फांसी के बाद क्या होता है उस रस्सी का, जिससे दी जाती है मौत की सजा

फांसी के बाद क्या होता है रस्सी का

दोस्तों वर्ष 2012 में निर्भया गैंगरेप और मर्डर के बाद अब उसके चारो गुनहगारों को फांसी की सजा का दिन नजदीक आ गया है । चारो मुजरिमो को 16 दिसंबर को सुबह 5:00 बजे फांसी पर लटकाया जायेगा । कोर्ट ने फांसी की सजा वही दिन तय किया है जिस दिन इन चारो ने निर्भया का रेप कर उसकी हत्या कर दी थी । खबरों के मुताबिक इसके लिए ट्रियल शुरू हो चूका है । फांसी के रस्सियां आ चुकी है लेकिन क्या आपको मालूम है की फांसी के बाद क्या होता है उस रस्सी का जिससे फंदा बनाकर मुजरिम को लटकाया जाता है ।फांसी के बाद क्या होता है उस रस्सी का, जिससे दी जाती है मौत की सजा

इस रस्सी के लेके तरह तरह की बाटे सामने आती रहती है । ब्रिटेन में जब तक फांसी जारी रही तब तक वह के जल्लादो के द्वारा वो फांसी की रस्सी के टुकड़े कर बेच देते थे और लोग उसे ख़ुशी ख़ुशी खरीदते थे । कोलकाता जेल के जल्लाद नाता मल्लिक ने ऐसा ही करके पैसा कमाया ।

फांसी की रस्सी को लेके अन्धविश्वास ये भी है कि अगर कोई इस रस्सा का टुकड़ा अपने घर पर रख ले या उसका लॉकेट पहन ले तो उसकी किस्मत बदल सकती है । इतिहास में ये उल्लेख मिलता है कि ब्रिटेन में जल्लाद इन रस्सी के टुकड़े करके उसे बेच देते थे और लोग खुशी खुशी उन्हें खरीदते थे। हालांकि 1965 में ब्रिटेन में फांसी पर रोक लगा दी गई ।

हालाँकि भारत में ये रस्सी जल्लाद को ही दे दी जाती है । कई अन्य देशो में इस रस्सी के कई छोटे टुकड़े करके कारगर के डेथ स्क्वॉड को दे दिया जाता है, जिसमें बड़े अधिकारियों से लेकर निचले स्तर तक के गार्ड तक शामिल रहते हैं |

लेकिन भारत में इस रस्सी को लेके ऐसा कोई अन्धविश्वास अभी नहीं सुना लेकिन वर्ष 2004 में जब नाटा मल्लिक जल्लाद ने रेप और मर्डर के दोषी धनंजय चटर्जी को फांसी दी तो उसने इस रस्सी के टुकड़ो से कमाई कि थी ।

मल्लिक फांसी की रस्सी से लॉकेट बेचने लगा

दरअसल बंगाल में ना जाने कैसे ये अंधविश्वास फैल गया कि फांसी की रस्सी का लॉकेट पहनने से किस्मत पलट जाती है। अगर आपके पास नौकरी नहीं है तो रोजगार मिल जाता है। अगर कर्ज में दबे हैं तो इससे छुटकारा मिल जाएगा। बेहतर दिन शुरू हो जाएंगे। व्यापार में घाटा हो रहा है तो किस्मत बदल जाती है।

वो फांसी देने के बाद रस्सी साथ ले आता था

इसके बाद भी नाटा मल्लिक ने जमकर ऐसी रस्सियां बेचीं. एक लॉकेट की रस्सी उसने करीब 2000 रुपये तक बेची. उसके पास पुरानी फांसी दी गईं रस्सियां भी थीं | इसकी लॉकेट वो 500 रुपये में बेचता था. मल्लिक ने अपने घर के बाहर एक तौलिए को फांसी की गांठ की शक्ल में टांग रखा था | इस रस्सी को कई बार जला भी दिया जाता है. कई बार जब बहुत विवादित कैदी या बड़े आतंकवादी को फांसी दी जाती है तो उसकी रस्सी को भी तुरंत नष्ट कर दिया जाता है.

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