Vinod Khanna ने कई सालों तक छिपा कर रखा था ये राज, फैंस के दिलों में आज भी जिंदा

बॉलीवुड इंडस्ट्री में विनोद खन्ना एक जाना-पहचाना नाम है. उन्होंने अपने करियर में बहुत सी हिट फिल्मों में काम किया और दर्शकों का मनोरंजन भी किया है. उन्होंने बहुत तेजी से सफलता की सीढ़ियां चढ़ी थी. इतना ही नहीं उस वक्त लोगों को लगने लगा था कि यह तो अमिताभ बच्चन को भी पीछे छोड़ देंगे. विनोद खन्ना ने कई बेहतरीन फिल्‍मों में काम करने के बाद जब राजनीति की ओर रुख किया तो वो साल 1997 और 1999 में 2 बार पंजाब के गुरदासपुर क्षेत्र से भाजपा की ओर से सांसद चुने गए थे. फिर साल 2002 में वो संस्कृति और पर्यटन के केन्‍द्रीय मंत्री भी रहे और बाद में वे भारत के विदेश राज्‍य मंत्री भी बने.

विनोद खन्ना के बारे में ये जानकार हैरानी होगी की वह पहले बॉलीवुड में छाए फिर अचानक ही उन्होंने आध्यात्मिक यात्रा पर ओशो के पास चले गए. उन्होंने आध्यात्मिकता की तरफ जानें का फैसला उस वक्त लिया जब उनका करियर उफान पर चढ़ गया था. लेकिन बाद में विनोद लौट आए थे. वापसी करने के बाद उनका करियर एक बार से चल निकला था. इसके बाद विनोद खन्ना ने अभिनय के बाद राजनीति में भी अपना हाथ आज आजमाया. वह एक राजनेता बने और यहां भी छा गए थे.

विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पेशावर में हुआ था. उनका परिवार अगले साल 1947 में हुए विभाजन के बाद पेशावर से मुंबई आ गया था. उनके माता-पिता का नाम कमला और किशनचंद खन्ना था. अभिनेता राहुल खन्‍ना और अक्षय खन्‍ना विनोद के बेटे हैं. विनोद ने अपनी 2 शादियां की थीं.

उन्होंने अपने फिल्मी सफर की शुरूआत साल 1968 मे आई फिल्म ‘मन का मीत’ से की जिसमें उन्होने एक खलनायक का अभिनय किया था. कई फिल्मों में खलनायक के किरदार निभाने के बाद 1971 में उनकी पहली सोलो हीरो वाली फिल्म हम तुम और वो आई.

वो अपने दौर के सफलतम अभिनेताओं में से एक थे लेकिन जब उनका करियर पीक पर था तभी उन्‍होंने फिल्‍मों से दूरियां बनानी शुरू कर दीं. फिल्‍मों में उनके बेहतरीन अभिनय के लिये दादा साहेब पुरस्‍कार और फिल्‍म फेयर का पुरस्‍कार भी दिया जा चुका है.

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