हैदराबाद के कोविड हॉस्पिटल का हाल, जिन्हें क्वारैंटाइन होना चाहिए वो सड़क पर बैठे हैं

हैदराबाद की नीना पिछले चार दिन से गांधी अस्पताल के सामने सड़क पर गंदगी में बैठी हैं। इनकी मां कोरोना पॉजिटिव हैं और 13 दिनों से अस्पताल में भर्ती है, लेकिन नीना को इस बात की भी जानकारी नहीं है कि उनकी मां जिंदा है मर गयी। 3 करोड़ से ज्यादा की आबादी के लिए 450 डॉक्टर थे, इनमें से भी 110 कोरोना संक्रमित हो गए।

हैदराबाद की रहने वाली नीना को 13 दिन से हॉस्पिटल से अपनी मां की कोई जानकारी नहीं मिली है, कहती हैं- पता नहीं कि मां जिंदा भी है या नहीं। गांधी हॉस्पिटल की एक डॉक्टर के मुताबिक, सरकार हर दिन 8-10 मौतों का आंकड़ा बताती है, जबकि हर दिन 25 से ज्यादा मर रहे; कई पर तो बिना टेस्ट के ही मर रहे हैं।

हैदराबाद के कोविड हॉस्पिटल का हाल, जिन्हें क्वारैंटाइन होना चाहिए वो सड़क पर बैठे हैं

हैदराबाद की नीना पिछले चार दिन से गांधी अस्पताल के सामने सड़क पर गंदगी में बैठी हैं। इनकी 64 वर्षीय मां कोरोना पॉजिटिव हैं और बीते 13 दिन से अस्पताल में एडमिट हैं। वह बताती हैं कि हमारे पास अपनी मां की कोई खबर नहीं है। हमें नहीं पता कि वह अंदर जिंदा भी हैं या मर चुकी हैं। नीना कहती हैं कि पहले हम मां को चेस्ट हॉस्पिटल में ले गए थे, लेकिन वहां से हमें गांधी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। यहां मां को एडमिट तो किया गया लेकिन अब अंदर क्या हो रहा है, कोई नहीं बताता।

गांधी अस्पताल के बाहर बैठे इन लोगों की तकलीफों का कारण डॉक्टर या हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन नहीं बल्कि राज्य सरकार का है। यहां के डॉक्टरों का तो यही कहना है। डॉक्टर बहुत कम है, पैरामेडिकल स्टॉफ न के बराबर, 12-12 घंटे काम कर रहे हैं।

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