एक लाख से ज्यादा मरीज ठीक हुए, भारत में इन 8 दवाओं की वजह से

दुनिया भर में कोरोना वायरस की बीमारी फैली हुई है, वैक्सीन की खोज जारी है लेकिन अब तक कोई सटीक दवा नहीं बन सकी है. भारत में भी कोरोना के संक्रमण तेजी से बढ़ रहे हैं. देखा जाए तो यहां कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों की भी अच्छी तादाद है. भारत में 1 लाख 30 हजार के करीब कोरोना मरीज ठीक हो चुके हैं.

देखिये भारत में कोरोना वायरस के मरीजों का किन दवाओं और थेरेपी से इलाज किया जा रहा है.

एक लाख से ज्यादा मरीज ठीक हुए, भारत में इन 8 दवाओं की वजह से

  • रेमडेसिवीर – WHO के ट्रायल में इस दवा को Covid-19 के कारगर इलाजों में से एक माना गया है. यह शरीर में वायरस रेप्लिकेशन को रोकता है. ये एक एंटीवायरल दवा है, जिसे सबसे पहले 2014 में इबोला के इलाज में इस्तेमाल किया गया था.
  • फेवीपिरवीर – इस दवा को सबसे पहले जापान की फ्यूजीफिल्म टोयामा केमिकल लिमिटेड ने विकसित किया था. यहाँ एक एंटीवायरल है जो वायरस रेप्लिकेशन को रोकने के लिए दी जाती है. इसे एंटी-इन्फ्लूएंजा दवा के रूप में प्रयोग किया जाता है.
  • टोसिलीज़ुमाब – यहाँ एक इम्यूनो सप्रेसेंट दवा है इसे आमतौर पर गठिया के इलाज में दी जाती है. मुंबई में, कोरोना वायरस के 100 से अधिक गंभीर मरीजों का इलाज इस दवा से किया गया है.
  • इटोलीजुमैब – दिल्ली और मुंबई में कोरोना के मामूली से लेकर गंभीर मामलों में ये दवा ट्रायल के तौर पर दी जा रही है, जिसके शुरुआती नतीजे जुलाई तक आएंगे. यह दवा आमतौर पर त्वचा के रोगों जैसे सोरायसिस, रुमेटॉयड आर्थराइटिस, मल्टीपल स्केलेरोसिस और ऑटोइम्‍यून रोग में किया जाता है.
  • हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन – कोरोना वायरस पर इस एंटी मलेरिया ड्रग के प्रभाव को लेकर पूरी दुनिया में बहस जारी है. द लैंसेट में छपी एक स्टडी के बाद WHO ने इसका सॉलिडैरिटी ट्रायल रोक दिया था. हालांकि स्टडी के लेखकों द्वारा इसे वापस लेने के बाद ट्रायल को फिर से बहाल कर दिया गया है. भारत इस दवा का सबसे बड़ा उत्पादक है.
  • डॉक्सीसाइक्लिन+आइवरमेक्टिन – डॉक्सीसाइकलीन एक एंडीबायोटिक दवा है, जिसका उपयोग यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, आंखों और श्वसन तंत्र संक्रमण के इलाज में किया जाता है. आइवरमेक्टिन शरीर में मौजूद कीड़ों को मारने की दवा के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.
  • रिटोनावीर+लोपिनावीर – ये एंटीवायरल एचआईवी के मरीजों के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं. सॉलिडैरिटी ट्रायल में इनकी जांच की जा रही है. कुछ स्टडीज से पता चला है कि ये दवाएं कोरोना के मरीजों के मृत्यु दर को कम करती हैं।
  • प्लाज्मा थेरेपी – प्लाज्मा थेरेपी में कोरोना से ठीक हो चुके मरीजों के शरीर से लिए गए प्लाज्मा को कोरोना के एक्टिव मरीजों के शरीर में डाला जाता है जिससे, उस मरीज के शरीर में कोरोना से लड़ने की एंटीबॉडी बन जाती है।

कोरोना के अलावा इन चार बीमारियों का भी नहीं है कोई वैक्सीन

Related posts

Leave a Comment