मध्य प्रदेश आयुष विभाग ने दावा किया है कि कोरोना संक्रमित रोगियों को आयुर्वेदिक काढ़े से ठीक किया जा रहा है

कोरोना में भारत को हजारों साल पुरानी आयुर्वेद पद्धति से मध्य प्रदेश में हराने का दावा किया जा रहा है। जिस कोरोना का इलाज पूरी दुनिया के डॉक्टर अब तक नहीं ढूंढ पाए है। मध्य प्रदेश सरकार के आयुष विभाग ने दावा किया है कि उसके दिए काढ़े के बाद कोरोना के पॉजिटिव मरीज भी ठीक हो गए हैं. आयुष विभाग के दावे के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या हजारों साल पुरानी भारतीय आयुर्वेद पद्धति ही कोरोना का काल है? पढ़िए ये रिपोर्ट.

जिस कोरोना की अब तक कोई इलाज नहीं निकला है वही कोरोना मध्य प्रदेश में आयुर्वेद से जंग हारता दिख रहा है. ये हम नहीं कह रहे, बल्कि ये मध्य प्रदेश आयुष विभाग का दावा है. मध्य प्रदेश आयुष विभाग दावा कर रहा है कि उसने बीते 1 महीने से कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर आयुर्वेदिक काढ़े का जो प्रयोग किया है अब उसके उसका परिणाम आ रहे हैं.

मध्य प्रदेश आयुष विभाग ने दावा कोरोना संक्रमित रोगियों को आयुर्वेदिक

कोरोना संक्रमित रोगियों को आयुर्वेदिक काढ़े से ठीक किया जा रहा है

आयुष विभाग कमिश्नर एम.के.अग्रवाल का दावा है कि आयुष विभाग ने 133 कोविड केयर सेंटर और क्वारनटीन सेंटर के जितने भी मरीजों को आयुर्वेदिक काढ़ा ‘आरोग्य कसायम’ पीने के लिए दिया वो सब अब ठीक हो चुके हैं. 2,294 मरीजों में से 2,199 ठीक हुए.

अब 95 की रिपोर्ट का इंतजार है. आयुष कमिश्नर के मुताबिक, कोरोना पॉजिटिव 2,294 मरीजों में से 2,199 ठीक हो गए. आयुष विभाग का ये प्रयोग इतना सफल हुआ है कि बकायदा केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश आयुष विभाग को बधाई देते हुए। उसे एक कोरोना मरीजों के लिए आयुर्वेद के नए प्रयोग करने को कहा है. खुद मध्य प्रदेश सरकार के स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा का कहना है कि भारत की प्राचीन पद्धति जिस तरह से मध्य प्रदेश में कोरोना की काट बन रही है उसे प्रदेश के बाकी हिस्से में भी ले जाना चाहिए और सिर्फ मरीजों के इलाज के लिए ही नहीं, बल्कि काढ़े को जीवनशैली में भी अपनाना होगा.

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