चंद्रग्रहण 2020 Timing: चंद्र ग्रहण 4 घंटे का, जानें कितने बजे लगेगा

Chandra Grahan 2020 तिथि और समय: 10 जनवरी को साल का पहला चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2020) लग रहा है| यह एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण (Upchaya Chandra Grahan) होगा, जो कि पूरे भारत में दिखने के साथ-साथ, अफ्रीका, एशिया, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी देखा जा सकेगा|  इस चंद्र ग्रहण की अवधि कुल 4 घंटे 01 मिनट की होगी |

lunar eclipse
lunar eclipse

वहीं सूर्यग्रहण के दिन सूर्य और पृथ्वी के बीच चंद्रमा आता है जो कि अमावस्या को संभव है। ब्रह्मांड में घटने वाली यह घटना है तो खगोलीय लेकिन इसका धार्मिक महत्व भी बहुत है। इसे लेकर आम जन मानस में कई तरह के शकुन-अपशकुन भी व्याप्त हैं। माना जाता है कि सभी बारह राशियों पर ग्रहण का प्रभाव पड़ता है। तो आइये जानते हैं कि 2020 में चंद्र ग्रहण कब और कितनी बार नज़र आयेगा।

साल २०२० का पहला ग्रहण आज लग रहा है |  यह ग्रहण पूर्ण ग्रहण न होकर एक उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा, जो पूर्ण चंद्र ग्रहण से काफी धुंधला होता है |  इस चंद्र ग्रहण की अवधि कुल 4 घंटे 01 मिनट की होगी|  इसके बाद साल 2020 में तीन और चंद्र ग्रहण पड़ेगें जो कि 5 जून, 5 जुलाई और 30 नवंबर को होंगे. खास बात यह सभी ग्रहण उपच्छाया ग्रहण ही होंगे| आइए,  जानते हैं आज लगने वाले चंद्र ग्रहण के आरंभ, मध्यकाल और मोक्षकाल के बारे में |

जाने , क्या है चंद्र ग्रहण लगने का समय? (Chandra Grahan Timing)

आज लगने वाला चंद्र ग्रहण रात को 10 बजकर 37 मिनट पर शुरू होगा और अगली तारीख यानी 11 जनवरी को तड़के पौने तीन बजे तक चलेगा | भारत के अलावा यह  ग्रहण यूरोप,  अफ्रीका, एशिया और आस्‍ट्रेलिया महाद्वीपों में भी देखा जा सकेगा|

इस चंद्रग्रहण की खास बातें

इस बार का चंद्र ग्रहण उपच्छाया चंद्र ग्रहण होगा। शास्त्रों  की मने तो उनमे उपच्छाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण के रुप में नहीं माना जाता है। इसलिए आज पूर्णिमा तिथि के पर्व और त्योहार मनाए जा सकेंगे।  इस ग्रहण में चंद्रमा मिथुन राशि में होगा, नक्षत्र पूर्नवसु रहेगा | मिथुन राशि के लोगों को चंद्र ग्रहण के समय सावधान रहने की जरूरत पड़ेगी।  पूर्नवसु नक्षत्र के लोगों को भी बेवजह की परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं |

क्या इस चंद्र ग्रहण पर सूतक लगेगा? (Sutak)

ज्योतिष शास्त्रों के अनुसार उपच्छाया चंद्र ग्रहण को ग्रहण की श्रेणी में नहीं रखा जाता है और यही वजह कि बाकी ग्रहणों की तरह इस चंद्र ग्रहण में सूतक काल नहीं लगेगा. सूतक काल ना लगने के कारण ना ही आज मंदिरों के कपाट बंद किए जाएंगे और ना ही पूजा-पाठ वर्जित होगी। इसलिए इस दिन आप सामान्य दिन की तरह ही सभी काम कर सकते हैं।

इस ग्रहण की सावधानियां और नियम क्या हैं?

यह ग्रहण चन्द्रमा का उपच्छाया ग्रहण है। यह सामान्य रूप से देखा नहीं जा सकेगा। इसमें चन्द्रमा पर केवल छाया की स्थिति रहेगी। इसमें चन्द्रमा सामान्य रूप से नहीं देखा जा सकेगा इसलिए इसमें किसी के लिए कोई भी सूतक के नियम लागू नहीं होंगे। पूर्णिमा की पूजा उपासना भी विधि विधान से की जा सकेगी।

क्या होता है चंद्रग्रहण (What is Chandra Grahan)?

जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तो सूर्य की पूरी रोशनी चंद्रमा पर नहीं पड़ती है. इसे चंद्रग्रहण कहते हैं. जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सरल रेखा में होते हैं तो चंद्रग्रहण की स्थिति होती है. चंद्रग्रहण हमेशा पूर्णिमा की रात में ही होता है. एक साल में अधिकतम तीन बार पृथ्वी के उपछाया से चंद्रमा गुजरता है, तभी चंद्रग्रहण लगता है. सूर्यग्रहण की तरह ही चंद्रग्रहण भी आंशिक और पूर्ण हो सकता है.

चंद्र ग्रहण क्यों होता है? (What Causes Chandra Grahan)

इसका सीधा सा जवाब है कि चंद्रमा का पृथ्वी की ओट में आ जाना. उस स्थिति में सूर्य एक तरफ, चंद्रमा दूसरी तरफ और पृथ्वी बीच में होती है. जब चंद्रमा धरती की छाया से निकलता है तो चंद्र ग्रहण पड़ता है.

क्या चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन ही पड़ता है? (Chandra Grahan on Full moon)

चंद्र ग्रहण पूर्णिमा के दिन पड़ता है लेकिन हर पूर्णिमा को चंद्र ग्रहण नहीं पड़ता है। इसका कारण है कि पृथ्वी की कक्षा पर चंद्रमा की कक्षा का झुके होना। यह झुकाव तकरीबन 5 डिग्री है इसलिए हर बार चंद्रमा पृथ्वी की छाया में प्रवेश नहीं करता. उसके ऊपर या नीचे से निकल जाता है। यही बात सूर्यग्रहण के लिए भी सच है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन होते हैं क्योंकि चंद्रमा का आकार पृथ्वी के आकार के मुकाबले लगभग 4 गुना कम है। इसकी छाया पृथ्वी पर छोटी आकार की पड़ती है इसीलिए पूर्णता की स्थिति में सूर्य ग्रहण पृथ्वी के एक छोटे से हिस्से से ही देखा जा सकता है। लेकिन चंद्र ग्रहण की स्थिति में धरती की छाया चंद्रमा के मुकाबले काफी बड़ी होती है। लिहाजा इससे गुजरने में चंद्रमा को ज्यादा वक्त लगता है।

Reason of Chandra Grahan:

चंद्र ग्रहण 2020:  इस साल कब है चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण ?

चंद्र ग्रहण (lunar eclipse) और सूर्य ग्रहण (solar eclipse) के बारे में प्राथमिक शिक्षा के दौरान ही विज्ञान की पुस्तकों में जानकारी दी जाती है कि ये एक प्रकार की खगोलीय स्थिति होती हैं। जिनमें चंद्रमा, पृथ्वी के और पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर चक्कर काटते हुए जब तीनों एक सीधी रेखा में अवस्थिति होते हैं। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आती है और चंद्रमा पृथ्वी की उपछाया से होकर गुजरता है तो उसे चंद्र ग्रहण कहा जाता है ऐसा केवल पूर्णिमा को ही संभव होता है। इसलिये चंद्र ग्रहण हमेशा पूर्णिमा को ही होता है।

Disclaimer: All information is gathered from various internet sources.

Source: hindi.astroyogi.com

Related posts

Leave a Comment