516 करोड़ खर्च, 17 साल में तैयार, कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु के बारे में जानें सबकुछ

बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले केंद्र सरकार ने कई योजनाओं की सौगात देनी शुरू कर दी है. इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) 18 सितंबर यानी आज ही के दिन 12 बजे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये मिथिलांचल को जोड़ने वाले कोसी रेल महासेतु का उद्घाटन करेंगे. इसके अलावा पीएम मोदी समस्तीपुर (Samastipur) रेलमंडल के कई योजनाओं का उद्घाटन करने के साथ सुपौल से आसनपुर कुपहा डेमू ट्रेन के परिचालन को हरी झंडी दिखाएंगे. कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु का लंबा इतिहास रहा है और इसका लंबे अंतराल से इंतजार भी किया जा रहा था.

कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु के बारे में जानें सबकुछ

क्या कहता है इतिहास?

आपको बता दें कि 1887 में निर्मली और भपटियाही (Saraigarh) के बीच मीटर गेज लिंक बनाया गया था, जो 1934 में विनाशकारी भूकंप की वजह से तबाह हो गया था. जिसके बाद कोसी और मिथिलांचल दो भागों में बंट गया था. 6 June 2003 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) ने कोसी मेगा ब्रिज लाइन परियोजना की आधारशिला निर्मली के एक कॉलेज में आयोजित समारोह में रखी थी.

क्या होगा फायदा?

ऐतिहासिक कोसी रेल महासेतु 1.9 KM लंबा है और इसके निर्माण में 516 Crore रुपये की लागत आई. 18 September को पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा कोसी महासेतु देश को समर्पित करने के बाद मिथिलांचल से जुड़ने में कुछ और दिनों का इंतजार करना पड़ेगा.

कोसी-मिथिलांचल को जोड़ने वाले महासेतु के बारे में जानें सबकुछ

सुपौल से सरायगढ़ (Supaul to Saraigarh) होते हुए कोसी महासेतु से गुजर कर ट्रेन असानपुर कुपहा हॉल्ट तक चलेगी. असानपुर कुपहा हाल्ट से झंझारपुर स्टेशन तक कार्य प्रगति पर है इन दोनों स्टेशनों के बीच 5 और छोटे पुलों का निर्माण किया जाना है, इस कार्य के पूर्ण होते ही कोसी से मिथिलांचल का दरभंगा स्टेशन से जुड़ जाएगा.

इस पुल का इंतजार करीब 80 साल से किया जा रहा था, अब जब पुल दोबारा बनकर तैयार है. तो करीब 300 KM. की दूरी 22 KM. में सिमट कर रह जाएगी. क्योंकि पुल बनने के बाद रेल सेवा शुरू हो जाएगी.

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