भारत में इजराइल कंपनी द्वारा Whatsapp हैकिंग के जरिये जासूसी का मामला

इजरायली कंपनी ने WhatsApp हैकिंग जरिये बनाया भारतीय हस्तियों को शिकार

इजराइली सर्विलांस फर्म एनएसओ ग्रुप ने पेगासस (Pegasus) नाम के स्पाइवेयर से भारतीय व्हाट्सप्प यूजर्स की जासूसी कर बड़ी बड़ी हडियो, पत्रकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओ को हैकिंग का शिकार बनाया । व्हाट्सऐप (WhatsApp) ने Israeli surveillance firm NSO Group पर मंगलवार को आरोप लगाया कि इस एजेंसी ने पूरी दुनिया से कुछ फ़ोन को हैककर जासूसी कि है । व्हाट्सऐप ने इस बात की भी पुष्टि करी है कि NSO Group (एनएसओ ग्रुप) ने पेगासस (Pegasus) नाम के स्पाइवेयर से भारतीय मानवाधिकार कार्यकर्त्ता और पत्रकारों को टारगेट किया है ।इजरायली कंपनी ने WhatsApp हैकिंग जरिये बनाया भारतीय हस्तियों को शिकार

आपके वॉट्सऐप तक ऐसे पहुंची इजरायली एजेंसी

इजराइली कंपनी द्वारा व्हाट्सऐप हैकिंग के जरिये भारतीय पत्रकारों और हस्तियों को शिकार बनाने कि खबर के आने के बाद भारतीय राजनीती में हंगामा मच गया है । रिपोर्ट में बताया गया है कि पेगासस (Pegasus) नाम का स्पाइवेयर केवल व्हाट्सऐप में ही तांकझाक नहीं करता, बल्कि पूरे फोन की जानकारी इकट्ठा करता है. दावा किया गया है कि पेगासस स्पाइवेयर व्हाट्सऐप के अलावा, माइक्रफोन रिकॉर्डिंग, ई-मेल, एसएमएस, कैमरा, सेल डाटा, टेलीग्राम, लोकेशन, कॉन्टैक्ट, फाइल्स, हिस्ट्री ब्राउजिंग, इंस्टेंट मैसेजिंग, कैलेंडर रिपोर्ट, सोशल नेटवर्किंग साइट, डिवाइस सेटिंग तक में स्पाइवेयर की पहुंच हो जाती है |

इजराइली स्पाईवेयर से भारतीय WhatsApp यूजर्स की जासूसी

इजराइल कि कंपनी ने तैयार किया है ये स्पाइवेयर । बहुत दिनों पहले ये खबर थी कि इस Pegasus नाम के स्पाईवेयर के जरिये पत्रकारों को एक्टिविस्ट्स को टारगेट किया जाता है परन्तु अब खुद Whatsapp ने यह कन्फर्म किया है कि ये स्पाइवेयर भारत में भी एक्टिव था और यहाँ के लोगो कि भी जासूसी कर रहा था ।  WhatsApp ने इंडियन एक्स्प्रेस को बताया है कि भारतीय पत्रकार और ह्यूमन राइट ऐक्टिविस्ट्स इस जासूसी का टार्गेट थेय हालांकि कंपनी ने ये नहीं बताया है कि इस स्पाईवेयर के जरिए कितने भारतीय लोगों की जासूसी की गई है ।

क्या है पेगासस (Pegasus)

Pegasus एक Spyware है और ये बेहद खतरनाक है क्युकी डिलीट होने के बाद भी काम करता है । Pegasus एक Spyware है और इसे  इजरायल की एजेंसी ने तैयार किया है. ये Facebook, Google ड्राइव और iCloud का डेटा ऐक्सेस कर सकता है. Financial Times की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कंपनी का ये टूल किसी यूजर के क्लाउड बेस्ड अकाउंट ऐक्सेस करने की क्षमता रखता है.

ये सॉफ्टवेयर या टूल Android और iPhone दोनों में ही काम करता है. रिपोर्ट के मुताबिक यह टूल लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन से अपलोड किए गए क्लाउड डेटा को ऐक्सेस करता है. अगर इस सॉफ्टवेयर को टार्गेट स्मार्टफोन से हटा दिया जाएग फिर भी ये काम करना जारी रखता है.

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